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कविता

संघर्ष कर

गौरव मनवानी
Jul 14, 20211 min read

संघर्ष कर संघर्ष कर।

इस हाथ की जो लकीर है,
यही पीर की जंजीर है,
पर माथे पे यदि नीर है,
तो तू भाग्य का भी अमीर है।
आप से परामर्श कर,
इस वीरता को स्पर्श कर,
संघर्ष कर, संघर्ष कर ।

न ख्याति का अभिमान हो,
न तू पीड़ा से परेशान हो,
गीता का तुझको ज्ञान हो,
तो न फल पे तेरा ध्यान हो।
पग जमा ले फ़र्श पर,
और दृढ़ तू यह आदर्श कर,
संघर्ष कर, संघर्ष कर ।

इस अग्निपथ पर अग्रसर,
हर काज को तू कर गुजर,
इस अग्नि में ही तू पिघलकर,
स्वर्ण की भाँति निखर,
संघर्ष से ही हर्ष कर,
श्रम रम्यता को दर्श कर,
संघर्ष कर, संघर्ष कर,
संघर्ष कर, संघर्ष कर ।

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