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हमारे बारे में

About Hindi Sahitya Sabha

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) की हिन्दी साहित्य सभा (HSS) परिसर में भाषा, साहित्य और रचनात्मक कलाओं को समर्पित एक अत्यंत जीवंत और सक्रिय छात्र संस्था है। प्रसिद्ध साहित्यकार और संस्थान के पूर्व कुलसचिव श्री गिरिराज किशोर जी द्वारा स्थापित 'सेंटर फॉर क्रिएटिव राइटिंग' की नींव पर पल्लवित यह सभा छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को एक उन्मुक्त मंच प्रदान करती है। यह संस्था केवल भाषा के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिसरवासियों को अपनी रचनात्मकता को कविता, गद्य, नाटक और वाद-विवाद के माध्यम से स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने का आत्मविश्वास देती है।

सभा का मूल दर्शन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की प्रसिद्ध पंक्तियों "निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल" से प्रेरित है। हालाँकि संस्था के नाम में 'हिन्दी' शब्द समाहित है, परंतु इसका उद्देश्य केवल हिन्दी ही नहीं, बल्कि उर्दू, पंजाबी और अन्य सभी हिंदुस्तानी भाषाओं और बोलियों के साहित्य को भी समान रूप से बढ़ावा देना है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सभा द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले विविध आयोजन हैं। उर्दू अदब को बढ़ावा देने के लिए सभा 'उर्दू मुशायरा' और सुप्रसिद्ध शायरों के साथ 'ग़ज़ल एवं शायरी लेखन कार्यशालाओं' का सफलतापूर्वक आयोजन करती है। हाल ही में इंटर-आईआईटी कल्चरल मीट के 'उर्दू मुशायरा' में प्रथम स्थान प्राप्त कर सभा ने अपनी इस बहुभाषी साहित्यिक सोच को राष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध भी किया है। इसके अलावा, सभा अपने मंचों पर केवल हिन्दी के महाकवियों ही नहीं, बल्कि ग़ालिब, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, जौन एलिया, और साहिर लुधियानवी जैसे महान उर्दू शायरों के साथ-साथ अमृता प्रीतम और अवतार सिंह संधू 'पाश' जैसे प्रतिष्ठित पंजाबी साहित्यकारों की रचनाओं और विचारधाराओं पर भी निरंतर विमर्श और साहित्यिक चर्चाएँ करती है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बदलते समय की मांग को समझते हुए, हिन्दी साहित्य सभा नए विचारों और नवाचारों के साथ निरंतर प्रगति कर रही है। परिसर में साहित्य को एक उत्सव का रूप देने के लिए सभा द्वारा 'अक्षर' (साहित्यिक महोत्सव), 'स्पंदन' (हिन्दी पखवाड़ा), 'अनंतिनी' (विशाल कवि सम्मेलन), और 'वसंत काव्योत्सव' जैसे भव्य आयोजन प्रतिवर्ष किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, 'संसदीय वाद-विवाद', 'तर्क' (आशुभाषण), और 'किस्सागोई' (स्पॉटिफाई पॉडकास्ट) जैसी आधुनिक और इंटरैक्टिव गतिविधियाँ भी संस्था की पहचान बन चुकी हैं। कुल मिलाकर, HSS एक ऐसा सशक्त परिवार है जो अपनी साहित्यिक विरासत को सहेजते हुए, सभी हिंदुस्तानी भाषाओं के सौंदर्य को आधुनिक ढंग से युवाओं तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है।