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ग़ज़ल

पत्थर नहीं बचे या मिरा सर बदल गया

व
विनायक सोनी
Sep 12, 20211 min read

पत्थर नहीं बचे या मिरा सर बदल गया
या फिर उसूल ए शह्रे सितमगर बदल गया

थोड़ी सी भीक ले के गदागर बदल‌ गया
थोड़ी सी दाद पा के सुख़नवर बदल गया

जाने लगे फ़कीर लिए चाक ए पैरहन
शायद मिज़ाज ए चश्म ए रफ़ूगर बदल गया

अव्वल तो मुद्दतों कहीं ठहरी नहीं निगाह
ठहरी कहीं निगाह तो मंज़र बदल गया

अब तो न दीजिए मुझे तौबा के मशवरे
ज़ाहिद भी मेरे हाथ से पीकर बदल गया

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