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कविता

क्यूँ आए हो

दिव्या शुक्ल
Jul 14, 20211 min read

तब तुम घर को आए हो
सूख गए जब नैन ये प्यासे
तब तुम घर को आए हो?

इन हाथो ने तुम्हें खिलाया,
तुम्ही निवाले भूल गए
काला टीका तुम्हें लगाया
नज़र चुरा तुम भूल गए।

टूट गयी जब आस सभी
तब क्या कहने तुम आए हो?

लाल आज बरसों बीते
तब तुम घर को आए हो...

उम्र बिताई लंबी मैंने
बैठ इसी एक चौखट पे
चौंक-चौंक कर राह निहारी
आती हर इक आहट पर,

आज उठी अर्थी जब मेरी
क्या लेने फिर आए हो?

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