चिठियाँ
ज
जतिन सैनीएक दिन जो उनसे नज़र मिली
कईं दिनों तक नज़रें मिलती रही
कईं दिनों तक सजदे होते रहे
कईं दिनों तक इबादत होती रही
एक दिन जो उनसे बात हुई
कईं दिनों तक तबियत उलझी रही
कईं दिनों तक मौसम गाते रहे
कईं दिनों तक हवाएं चलती रही
एक रात जो उसका चेहरा छुआ
कईं रातों तक असर गहरा हुआ
कईं रातों तक रातें हसीं रही
कईं रातों तक नींदें उड़ी रही
एक दिन जो उनकी खबर मिली
कईं दिनों तक खबरें मिलती रही
कईं दिनों तक क़ासिद खाली लौटे
कईं दिनों तक चिठियाँ जलती रही !!
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