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कविता

चिठियाँ

जतिन सैनी
Jul 14, 20211 min read

एक दिन जो उनसे नज़र मिली
कईं  दिनों तक नज़रें मिलती रही
कईं दिनों तक सजदे होते रहे
कईं दिनों तक इबादत होती रही
एक दिन जो उनसे बात हुई
कईं दिनों तक तबियत उलझी रही
कईं दिनों तक मौसम गाते रहे
कईं दिनों तक हवाएं चलती रही
एक रात जो उसका चेहरा छुआ
कईं रातों तक असर गहरा हुआ
कईं रातों तक रातें हसीं रही
कईं रातों तक नींदें उड़ी रही
एक दिन जो उनकी खबर मिली
कईं दिनों तक खबरें मिलती रही
कईं दिनों तक क़ासिद खाली लौटे
कईं दिनों तक चिठियाँ जलती रही !!

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