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कविता

अधूरे ख़्वाब

रवि कुमार यादव
Jul 14, 20211 min read

तुम सनम इक बार जो मिलते तो अच्छा था।।

लिख दिया था रिक्त मन में प्रेम रूपी छंद तुमने।
जन्मों से इस मौन लव पर दे दिया था गीत तुमने।।
इस डगर पर संग जो चलते तो अच्छा था।
तुम सनम इक बार जो मिलते तो अच्छा था।।

अब सनम हारा सा हूँ मैं आ भी जाओ गीत बनकर।
मेरे जीवन में रहो तुम प्रीत का संगीत बनकर।।
हमको अपना आज भी कहते तो अच्छा था।
तुम सनम इक बार जो मिलते तो अच्छा था।।

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