जंग की तैयारी है
उ
उत्कर्ष केशरवानीजिस शजर के साये में जिंदगी गुज़ारी है,
उस शजर के संग अब तो जंग की तैयारी है।
अपनी रहनुमाई पर गौर तुम करो यारों,
महफिलें तुम्हारी हैं दास्तां हमारी है।
इन इमारतों पर तुम क्यों गुमान करते हो,
अब्र बस तुम्हारा है बारिशें हमारी हैं।
कारवां बदलते गए मंजिलें बदलती गईं,
बिन रुके यूँ चलने की आरज़ू हमारी है।
कुछ नये ख़यालों का ज़िक्र तुम करो यारों,
गुफ्तगू तुम्हारी है शायरी हमारी है।
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