अज़ाब दोगे, सवाब देंगे
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अज़ाब दोगे, सवाब देंगे,
लबों के सारे हिसाब देंगे।
हमारा दामन भी पाक होगा,
सवाल के सब जवाब देंगे।
न हुक्म को हम यूँ भाव देंगे,
वतन को अपने न घाव देंगे।
नहीं रहेगी दिलों में नफ़रत,
कि नेक ख़्यालों को छाँव देंगे।
कसाई को हम किताब देंगे,
अज़ाब दोगे, सवाब देंगे।
मुहब्बतों को मक़ाम देंगे,
कि फ़िक्र को इख़्तिताम देंगे।
यक़ीं-ए-इंसां बना रहेगा,
कि काफ़िरों को इमाम देंगे।
ग़नीम को भी गुलाब देंगे,
अज़ाब दोगे, सवाब देंगे।
क़साब पर हम कलाम देंगे,
सियाहकारों को राम देंगे।
बुरे वक़्त में दिया जो तिनका,
तमाम दौलत इनाम देंगे।
उदास दिल को भी ख़्वाब देंगे,
अज़ाब दोगे, सवाब देंगे।
कि जिस्म ताने खड़े रहेंगे,
कि आदतों पर अड़े रहेंगे।
चराग़ गुल हो न हौसले का,
कि आँधियों से लड़े रहेंगे।
चिता से अपनी उधार ले कर,
फ़क़ीर चूल्हे को आग देंगे।
ज़लाम दिल को चराग़ देंगे,
अज़ाब दोगे, सवाब देंगे।
गुल-ए-ख़िज़ां को बहार देंगे,
अज़ाब दोगे, सवाब देंगे।
हमारा दामन भी पाक होगा,
सवाल के सब जवाब देंगे।
अज़ाब दोगे, सवाब देंगे,
लबों के सारे हिसाब देंगे।