परिसर में मानसिक स्वास्थ्य संकट और आत्महत्या की घटनाएँ
1. समस्या का परिचय
पिछले दो वर्षों में आईआईटी कानपुर परिसर में 9 आत्महत्याएँ हुईं — जिनमें 2 स्नातक छात्र, 5 स्नातकोत्तर छात्र और 2 कर्मचारी सदस्य शामिल थे। प्रत्येक घटना के बाद आक्रोश उठा, शोकसभाएँ हुईं, प्रश्न पूछे गए — और फिर सब पहले जैसा हो गया। यही चक्र बार-बार दोहराया जाता है। यह निर्वाक उस चक्र को तोड़ने का प्रयास है। इसका उद्देश्य किसी को दोष देना नहीं, बल्कि आँकड़ों और अनुभवों के माध्यम से समस्या की जड़ों को समझना और एक सार्थक संवाद की शुरुआत करना है। इस निर्वाक के लिए 188 छात्रों (80.3% UG, 19.7% PG) पर सर्वेक्षण किया गया।
2. छात्रों की मानसिक स्थिति — सर्वेक्षण के निष्कर्ष
1 से 5 के पैमाने पर मानसिक स्वास्थ्य के स्व-मूल्यांकन में:
लगभग हर चार में से एक छात्र (23.9%) ने अपनी मानसिक स्थिति को नकारात्मक (1 या 2) बताया — यह अपवाद नहीं, बल्कि एक स्थायी वास्तविकता है।
83.5% छात्रों ने अकादमिक/करियर संबंधी दबाव को मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे बड़ा नकारात्मक कारक बताया।
33.5% ने सामाजिक अलगाव, 23.4% ने रिश्तों की समस्याएँ, 20.7% ने आर्थिक और 20.7% ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उल्लेख किया — यह दर्शाता है कि मानसिक दबाव बहु-स्तरीय है।
कैंपस वातावरण और अकादमिक कार्यभार के प्रभाव पर 42.6% ने नकारात्मक (1 या 2) और 35.1% ने तटस्थ (3) प्रतिक्रिया दी। केवल 7.4% ने इसे सकारात्मक माना।
3. आत्म-हानि के विचार और चुप्पी की समस्या
सर्वेक्षण का सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि 16.5% छात्रों ने पिछले छह महीनों में आत्म-हानि से जुड़े विचारों का अनुभव किया। इसके अतिरिक्त 12.8% ने 'कहना नहीं चाहते' का विकल्प चुना, जो इस विषय से जुड़ी गहरी असहजता और चुप्पी को दर्शाता है। इन विचारों का अनुभव करने वालों में से केवल 11.7% ने किसी से बात की, जबकि 20.7% ने अनुभव होने के बावजूद कोई संवाद नहीं किया। यह स्पष्ट करता है कि समस्या केवल मानसिक पीड़ा की नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षित संवाद के अभाव की भी है।
4. CMHW और संस्थागत प्रयास
हाल के परिवर्तन:
1 दिसंबर से Institute Counseling Service (ICS) को पुनर्गठित कर मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (CMHW) बनाया गया।
संचालन समय 11:00 AM–7:00 PM से बढ़ाकर 10:00 AM–9:00 PM किया गया। हेड – क्लिनिकल (मनोचिकित्सक) का नया पद सृजित हुआ और एक महिला मनोचिकित्सक को शामिल किया गया।
फिर भी छात्रों में जागरूकता और विश्वास की कमी:
केवल 31.9% छात्र CMHW की सेवाओं से पूर्णतः परिचित हैं, 30.3% आंशिक रूप से और 37.8% पूरी तरह अनजान हैं।
CMHW से सहायता लेने की संभावना: केवल 14.9% ने 'अत्यंत संभावित' बताया, जबकि 21.8% ने 'अत्यंत असंभावित' और 26.6% ने 'संभवतः असंभावित' कहा।
सहायता न लेने की प्रमुख बाधाएँ: सामाजिक कलंक और निर्णय का भय, तथा उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता पर विश्वास की कमी।
CMHW द्वारा 'Dialogues' श्रृंखला की शुरुआत की गई है जो एक सकारात्मक कदम है, किन्तु नीतिगत परिवर्तन और छात्र-अनुभव के बीच की खाई अभी पाटी नहीं जा सकी है।
5. प्रशासन और छात्रों के बीच विश्वास की कमी
36.2% छात्रों ने किसी भी समस्या के लिए प्रशासन से संपर्क करने को 1/5 (न्यूनतम) रेट किया। प्रशासन से दूरी के प्रमुख कारण: दुष्परिणामों का भय, समय पर कार्रवाई न होने की आशंका, और यह विश्वास कि प्रशासन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेगा। प्रोफेसर अर्क वर्मा ने द्विपक्षीय वार्तालाप को समाधान बताया, किन्तु जब तक छात्र प्रशासन को एक सुरक्षित माध्यम नहीं मानते, यह वार्ता एकतरफा रहेगी। यह दूरी संवाद की नहीं, भरोसे की कमी की समस्या है।
6. क्लब्स और सामुदायिक भूमिका
क्लब्स और पाठ्येतर गतिविधियाँ तनाव से राहत देने का माध्यम मानी जाती हैं, किन्तु हिंदी साहित्य सभा के पूर्व समन्वयक छायांक गर्ग के अनुसार — 'हमने हर चीज़ को इतना प्रतिस्पर्धापूर्ण बना दिया है कि कार्यक्रमों में भी आनंद लेना भूल जाते हैं।' एक Y25 छात्र ने इसके विपरीत क्लब्स को मित्रता और नई शिक्षा का माध्यम बताया — अतः क्लब्स को समस्या नहीं ठहराया जा सकता। सबसे महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि आत्महत्या की खबर के बाद भी 55.3% छात्रों ने किसी मित्र से इस विषय पर बात नहीं की और 85.1% ने कभी कोई मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला नहीं ली। समस्या यह नहीं कि भावनाएँ नहीं हैं — समस्या यह है कि उन पर प्रतिक्रिया देने की सामूहिक प्रवृत्ति अभी विकसित नहीं हुई है।
7. समग्र निष्कर्ष और आगे की राह
संस्थागत स्तर पर आवश्यक कदम:
CMHW की जागरूकता बढ़ाना — विशेषकर नए छात्रों के ओरिएंटेशन में।
सामाजिक कलंक को कम करने हेतु खुले सामुदायिक संवाद और 'Dialogues' जैसे कार्यक्रमों का विस्तार।
साप्ताहिक ध्यान/योग सत्र और छात्रों को एक-दूसरे को भावनात्मक सहारा देना सिखाने वाले कार्यक्रम।
महिला मनोचिकित्सकों की संख्या बढ़ाना और अकादमिक पाठ्यक्रम में सुधार — जिमखाना अध्यक्ष अयान गुप्ता ने इन प्रयासों की पुष्टि की है।
सामुदायिक स्तर पर सबसे बड़ी आवश्यकता:
संस्थागत परिवर्तन अपनी जगह आवश्यक हैं, परन्तु इस समस्या की जड़ व्यवस्था से भी गहरी है। जब तक छात्र एक-दूसरे का ध्यान नहीं रखेंगे, एक-दूसरे से बात नहीं करेंगे — तब तक कोई भी संस्था अकेले इस संकट को नहीं रोक सकती। यदि कोई परिचित कई दिनों से नहीं दिखा, तो उसकी खबर लेना केवल सहानुभूति नहीं — यह मानवीय दायित्व है।
पूर्ण प्रतिवेदन (चार्ट एवं चित्रों सहित) नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड करें।