परिसर में अस्वास्थ्यकर खान-पान : सामान्य दिनचर्या या समस्या?
1. समस्या का परिचय
आईआईटी कानपुर का छात्र जीवन निरंतर गतिशील है — कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ, क्लब गतिविधियाँ और देर रात तक जागना इसकी पहचान बन चुके हैं। इसी भागदौड़ में नाश्ता छोड़ना, दिन में भोजन टालना और रात को जंक फूड से पेट भरना कई छात्रों की दिनचर्या बन गई है। इसे 'पढ़ाई के दबाव की कीमत' मानकर सहन किया जाता है, परन्तु यह चुप्पी समस्या को और गहरा करती है। इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए निर्वाक की टीम ने लगभग 350 छात्रों पर सर्वेक्षण किया — जिसमें सभी वर्षों के UG और PG छात्र शामिल थे।
2. वर्तमान भोजन व्यवस्था की स्थिति
भोजन के प्राथमिक स्रोत:
73.9% छात्र हॉस्टल मेस पर निर्भर हैं, 46.4% कैंटीन पर। परन्तु 16.8% ऑनलाइन डिलीवरी (Swiggy/Zomato) और 7% बाहरी विक्रेताओं पर निर्भर हैं — जो यह संकेत देता है कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों की आवश्यकताओं को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पा रही।
भोजन गुणवत्ता: 73% छात्रों ने हॉस्टल मेस को 5 में से 3 या उससे कम रेटिंग दी; कैंटीन को 61% ने 3 या उससे कम अंक दिए।
47% छात्रों ने कहा कि मेस में स्वस्थ भोजन के विकल्प बिल्कुल पर्याप्त नहीं हैं; 32.5% ने आंशिक रूप से संतोषजनक बताया। एक छात्र ने कहा — 'मेनू में केवल कार्बोहाइड्रेट हैं, प्रोटीन बिल्कुल नहीं।'
परिसर के कुल ~105 खाद्य विकल्पों में से केवल 30 अपेक्षाकृत स्वस्थ हैं, जबकि 75 तले-भुने या अधिक वसा वाले हैं। चाइनीज़ श्रेणी में तो एक भी स्वस्थ विकल्प नहीं है।
सितंबर 2025 में FSSAI प्रशिक्षण कार्यशाला और स्वास्थ्य केंद्र द्वारा 'सैंपल मेनू' जैसे प्रयास हुए हैं, किन्तु जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव अभी सीमित है। हॉल 3 के मेस सचिव देवांश ने बताया कि स्वास्थ्यप्रद भोजन बनाने के प्रयासों के बावजूद, छात्रों का स्वाद की माँग पर जोर बावर्चियों पर दबाव बनाता है।
3. छात्रों की खान-पान दिनचर्या और जंक फूड की ओर झुकाव
नाश्ते की उपेक्षा:
- 77.1% छात्र प्रतिदिन नाश्ता नहीं करते — 36.2% विरले ही और 8.1% कभी नहीं। CMHW की काउंसलर डॉ. आकांक्षा के अनुसार नाश्ता रात के उपवास को तोड़ता है और पूरे दिन की कार्यक्षमता का आधार है।
देर रात भोजन और जंक फूड:
50.4% छात्रों का अंतिम भोजन रात 8 से 10 बजे के बीच होता है, जबकि 29.3% रात 10 बजे के बाद खाते हैं।
35.9% छात्र प्रतिदिन रात 11 बजे के बाद कुछ न कुछ खाते हैं। GH-1 कैंटीन प्रबंधक के अनुसार रात 10 बजे से 2 बजे के बीच सर्वाधिक भीड़ होती है — प्रतिदिन 400-500 चाय के कप और 50-60 चिप्स के पैकेट बिकते हैं।
जंक फूड चुनने के कारण: 60.9% स्वाद की प्राथमिकता, 38.8% आसान उपलब्धता, 25.5% समय की कमी और 23.2% अकादमिक तनाव।
परिसर के फल विक्रेता के अनुसार ताजे फल और प्राकृतिक जूस के बावजूद छात्र पैक्ड ड्रिंक्स, कोल्ड कॉफी और मीठे पेयों को प्राथमिकता देते हैं। Mama Mio के प्रबंधक ने भी फलों की माँग को अपेक्षाकृत कम बताया।
PG छात्र प्रतिनिधि तमल ने बताया कि शोधार्थी देर रात प्रयोगशाला से लौटकर रात 11-12 बजे कैंटीन में मुख्य भोजन करते हैं। यह दिनचर्या उनके स्वास्थ्य पर गंभीर दीर्घकालिक प्रभाव डालती है।
4. स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन पर प्रभाव
शारीरिक प्रभाव (सर्वेक्षण के अनुसार):
39.4% छात्रों ने वजन में अनियमित बदलाव, 39.1% ने पाचन संबंधी समस्याएँ, 29.9% ने नींद की समस्याएँ और 21.4% ने लगातार थकान की शिकायत की।
स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. निगम ने तीव्र Gastritis के बढ़ते मामलों का संबंध मसालेदार और अनियमित भोजन से जोड़ा।
मानसिक और शैक्षणिक प्रभाव:
71% छात्रों ने स्वीकार किया कि उनका खान-पान मानसिक स्थिति और निजी जीवन को प्रभावित करता है — थकावट, चिड़चिड़ापन और भावनात्मक असंतुलन सामान्य अनुभव बन चुके हैं।
61% छात्रों ने माना कि खान-पान उनकी पढ़ाई को प्रभावित करता है। हॉल-8 के मेस सचिव ने बताया कि अकादमिक दबाव के कारण पीएचडी छात्र stress eating और binge eating के शिकार हो जाते हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि थकान को मेहनत का प्रतीक और खराब खान-पान को मजबूरी मानकर नजरअंदाज किया जाता है — इसी सोच के कारण अस्वास्थ्यकर आदतें गहरी जड़ें जमाती हैं।
5. छात्रों की माँगें और सुझाव
प्रोटीन युक्त भोजन: हर भोजन में अंडे, दूध, पनीर, सोया या चिकन जैसे स्रोत अनिवार्य हों — विशेषकर जिम जाने वाले छात्रों के लिए।
कम तेल का उपयोग: एक छात्र ने व्यंग्यात्मक रूप से लिखा — 'Chickens turn into fish swimming in the sea of oil.' भोजन में अत्यधिक तेल स्वाद और स्वास्थ्य दोनों को बिगाड़ता है।
स्वच्छता में सुधार: FSSAI प्रशिक्षण के बावजूद नियमित हाइजीन जाँच और बाहरी ऑडिट की माँग।
सस्ते और सुलभ स्वस्थ विकल्प: 'Subway के अलावा कैंपस में कोई स्वस्थ आउटलेट नहीं' — फल की दुकानें बढ़ाने और सस्ते पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराने की माँग।
6. समग्र निष्कर्ष
यह समस्या व्यक्तिगत पसंद या इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है। जब परिसर में स्वस्थ, संतुलित और आकर्षक भोजन सहज रूप से उपलब्ध नहीं होता, तो जंक फूड स्वाभाविक विकल्प बन जाता है। सबसे उत्साहजनक तथ्य यह है कि 55% छात्रों ने स्पष्ट कहा — यदि स्वस्थ भोजन किफायती और आसानी से उपलब्ध हो, तो वे निश्चित रूप से उसे चुनेंगे। यह परिवर्तन संभव है — बशर्ते प्रशासन, मेस प्रबंधन और छात्र मिलकर भोजन व्यवस्था को स्वास्थ्य की दृष्टि से प्राथमिकता दें।
पूर्ण प्रतिवेदन (चार्ट एवं चित्रों सहित) नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड करें।