आईआईटी कानपुर परिसर में लावारिस कुत्तों की समस्या
1. समस्या का परिचय
आईआईटी कानपुर केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि हजारों छात्रों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों का आवास भी है — एक लघु नगर के समान। वर्षों से परिसर में लावारिस कुत्तों की उपस्थिति रही है, किन्तु हाल के वर्षों में उनकी संख्या और उससे उत्पन्न समस्याएँ तेजी से बढ़ी हैं। कचरे का फैलाव, काटने की घटनाएँ, और भोजन स्थलों पर कुत्तों की भीड़ अब संस्थागत स्तर की चिंता बन चुकी है। Animal Welfare Cell (AWC) द्वारा भेजे जा रहे ईमेल और सीनेट बैठकों में उठते सवाल इस बात का प्रमाण हैं। यह निर्वाक विभिन्न पक्षों के अनुभवों को सामने रखकर समस्या की गहराई को समझने का प्रयास है।
2. छात्रों के अनुभव एवं दैनिक जीवन पर प्रभाव
206 छात्रों पर किए गए सर्वेक्षण से निम्नलिखित तथ्य उभरे:
सबसे बड़ा वर्ग (37.9%) स्वयं को 'तटस्थ' बताता है — यह उदासीनता नहीं, बल्कि अनुकूलन की मजबूरी है।
28.6% छात्र कुत्तों से डर या असहजता महसूस करते हैं।
53.9% छात्र कुत्ते सामने आने पर रास्ता बदल लेते हैं — केवल 13.6% मित्रतापूर्ण व्यवहार करते हैं।
71.7% छात्रों की प्राथमिक चिंता स्वच्छता, 62.9% की आक्रामक व्यवहार और 56.1% की कुत्तों की अधिक संख्या है।
89.1% छात्रों ने हॉस्टल क्षेत्र में, और 60.4% ने कैंटीन/मेस के पास सर्वाधिक कुत्ते देखे।
जो छात्र कुत्तों से स्नेह रखते हैं, वे उन्हें करुणा और सह-अस्तित्व के प्रतीक मानते हैं और घटनाओं को मानवीय लापरवाही से जोड़ते हैं। दूसरी ओर, भय रखने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल विंग्स और OAT जैसे स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी निजी स्थान का उल्लंघन है।
3. भावनात्मक एवं मानसिक कल्याण पर प्रभाव
कुत्तों की उपस्थिति का मनोवैज्ञानिक प्रभाव विभाजित है। 55.9% छात्र कुत्तों से दूरी बनाए रखते हैं, जबकि केवल 7.8% उनके साथ नियमित रूप से समय बिताते हैं। 45.1% छात्रों को हॉस्टल में कुत्तों की मौजूदगी से माहौल अधिक घरेलू लगता है, किन्तु 36.8% इसे नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं। तनाव में राहत देने वाले साथी के रूप में कुत्तों को देखने वाले छात्र अल्पमत में हैं — अधिकांश के लिए वे मानसिक सुकून नहीं, बल्कि असुरक्षा का स्रोत हैं। निष्कर्षतः, किसी भी नीति को कुत्ते-प्रेमियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए, भय रखने वाले छात्रों की मानसिक शांति को प्राथमिकता देनी होगी।
4. स्वच्छता एवं सुरक्षा
स्वच्छता
46.3% छात्रों ने कॉरिडोर व कॉमन एरिया में पशु अपशिष्ट को सबसे बड़ी समस्या बताया। 87.6% छात्रों ने कूड़े की बिखरावट की समस्या का अनुभव किया, 47.2% ने व्यक्तिगत सामान को नुकसान और 45.6% ने जूते चबाए जाने की शिकायत की। Mama Mio के दुकानदारों ने बताया कि बच्चों के हाथ से खाना छीन लेने की घटनाएँ हो चुकी हैं। हॉल 10 के प्रेसिडेंट ने कहा — 'मैं कैंटीन में गिलास में चाय पीता ही नहीं, क्योंकि कुत्ते प्लेट और कप चाट रहे होते हैं।'
सुरक्षा
80% से अधिक छात्र साइकिल चलाते या दौड़ते समय कुत्तों द्वारा पीछा किए जाने की समस्या झेल चुके हैं। स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार हर एक-दो दिन में कम से कम एक dog-bite का मामला आता है और एक ही दिन में 13-14 काटने की घटनाएँ भी रिपोर्ट हो चुकी हैं। बीते दो वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या और आवृत्ति दोनों में वृद्धि हुई है। OAT और SAC जैसे स्थानों पर कुत्तों के प्रवेश से 47.1% छात्रों ने आयोजनों के दौरान असुविधा अनुभव की।
5. जिम्मेदार संस्थाएँ और उनकी स्थिति
भारतीय कानून (PCA Act 1960) के अंतर्गत आवारा कुत्तों को हटाना या मारना गैरकानूनी है। केवल Animal Birth Control (ABC) और Anti-Rabies Vaccination (ARV) मान्य उपाय हैं। यह बहस अभी अनिर्णीत है कि घनी आबादी वाला शैक्षणिक परिसर कुत्तों का 'प्राकृतिक आवास' माना जाए या नहीं।
AWC (Animal Welfare Cell) की स्थापना 2018 में हुई थी। अप्रैल 2025 से अब तक 120 कुत्तों का टीकाकरण और 30 की नसबंदी हो चुकी है, किन्तु 47.3% छात्र इस संस्था से पूरी तरह अनजान हैं।
54.5% छात्रों ने campus management की प्रभावशीलता को 1/5 (न्यूनतम) रेटिंग दी। हॉल 10 के प्रेसिडेंट ने कहा — 'AWC को कई बार मेल की, लेकिन कोई response नहीं आया।'
जिमखाना अध्यक्ष के अनुसार, COVID के दौरान खाली परिसर में पले कुत्ते अब अधिक आक्रामक हैं। 'Animal Aliaz Wing' बनाई गई है, किन्तु संसाधनों की कमी के कारण इसकी क्षमता सीमित है।
6. सुझाव: व्यावहारिक उपाय
परिसर-व्यापी एकीकृत नसबंदी एवं टीकाकरण अभियान — ज़ोन-आधारित योजना के साथ, ताकि खंडित प्रयासों की सीमाएँ दूर हों।
निर्धारित Feeding Zones — IIT Madras की तर्ज पर केवल पाँच निर्धारित स्थानों पर भोजन देने की अनुमति, अनधिकृत फीडिंग पर प्रतिबंध और जुर्माना।
Dog House / Shelter Spots — प्रत्येक दो-तीन हॉल के बीच एक आश्रय स्थल, जहाँ स्वास्थ्य निगरानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो।
भौतिक अवरोध (Physical Barriers) — LHC, लाइब्रेरी और अकादमिक भवनों में कुत्तों के प्रवेश पर नियंत्रण।
बेहतर कचरा प्रबंधन — Animal-proof डस्टबिन और नियमित सफाई, जिससे कुत्तों की भोजन-निर्भरता कम हो।
Digital Stray Directory — IIT Bombay की तरह प्रत्येक कुत्ते का रिकॉर्ड, जिसमें नसबंदी/टीकाकरण की स्थिति और आक्रामकता की जानकारी हो।
जागरूकता कार्यक्रम — AWC और जिमखाना द्वारा सुरक्षित व्यवहार, dog-bite प्राथमिक उपचार और कुत्तों के स्वभाव पर संयुक्त सत्र।
7. समग्र निष्कर्ष
यह मुद्दा केवल 'कुत्तों को हटाने' या 'उनकी देखभाल' तक सीमित नहीं है — यह परिसर प्रबंधन का प्रश्न है। एक ओर कानूनी बाधाएँ (PCA Act) हैं, दूसरी ओर छात्रों की सुरक्षा और स्वच्छता की अपेक्षाएँ। इस 'दोहरी चुनौती' का समाधान तदर्थ प्रयासों से नहीं, बल्कि एक एकीकृत, पारदर्शी और दीर्घकालिक नीति से संभव है। प्रशासन, AWC, जिमखाना और छात्र — सभी को मिलकर ऐसा ढाँचा बनाना होगा जहाँ पशु-कल्याण और मानव-सुरक्षा दोनों को समान महत्व मिले। वास्तविक सह-अस्तित्व तभी संभव है जब सहानुभूति और सुरक्षा साथ-साथ चलें।
पूर्ण प्रतिवेदन (चार्ट एवं चित्रों सहित) नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड करें।